Thursday, 29 December 2011

कोई भी नेता बन सकता है ?

सच्चे अर्थों में नेता वो होता है जिसकी नेतृत्व क्षमता कि पूजा खुद इतिहास करे।
हाथ जोड़कर वोट मांग लेने से कोई नेता नहीं बन जाता।

एक नेता में और एक अगुआ में क्या अंतर होता है ?
हमारा स्वाधीनता संग्राम 1857 में शुरू हुआ और 1947 में हमें आजादी मिली।
इन 90 सालों में न जाने कितने देशभक्त क्रांतिकारियों ने देश के लिए अपनी जान दी लेकिन इनमें से सिर्फ सुभाष चन्द्र बोस को ही "नेताजी" कहा जाता है।
गांधी जी को भी "महात्मा" कहा जाता है "नेता" नहीं तो आखिर क्या अंतर होता है एक नेता में और एक अगुआ में।
क्या कोई भी ऐरा-गैर-नथ्थू-खैरा नेता बन सकता है ?

"तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूँगा"

आखिर नेताजी ने देशवासियों से खून ही क्यों माँगा ?
हीरे, जवाहरात, सोना-चांदी क्यों नहीं माँगा ?
वोट क्यों नहीं माँगा ?

क्या सिर्फ हाथ में कलम पकड़ लेने से कोई भी विद्वान बन सकता है ?
क्या सिर्फ हाथ में तलवार पकड़ लेने से कोई भी योद्धा बन सकता है ?
क्या सिर्फ हाथ जोड़कर वोट मांग लेने से कोई भी नेता बन सकता है ?

राजनीति का मतलब चुनाव लड़ना और देश का प्रधानमन्त्री बन जाना नहीं होता।
राजनीति का मुख्य उद्देश्य देशवासियों को "सुरक्षा, शान्ति,और सुविधाएं" देना और देश की आने वाली पीढ़ियों को "उज्जवल और सुरक्षित भविष्य" देना होता है।

सच्चे अर्थों में नेता वो होता है जिसकी नेतृत्व क्षमता कि पूजा खुद इतिहास करे।
हाथ जोड़कर वोट मांग लेने से कोई नेता नहीं बन जाता।

जय हिंद, जय भारत !!

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